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डा. à¤à¤¸à¤•े सिंह ने आगे बताया कि पिछले वरà¥à¤· लगातार बारिश और नम मौसम के कारण गाजीपà¥à¤° सहित आसपास के जिलों में केले में à¤à¤• नई बीमारी देखने को मिली थी, जिसे पिटिंग बà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿ कहते हैं। यह à¤à¤• फफूंद जनक बीमारी है जो à¤à¤• जगह से दूसरी जगह काफी तेजी से फैलती है और केले के बागानों को काफी नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाती है। यह अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• आरà¥à¤¦à¥à¤° मौसम के कारण केरल जैसे पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ में फैलने वाली à¤à¤• नई फफूंद जनक बीमारी है, लेकिन पिछले वरà¥à¤· लगातार बारिश से यूपी के गाजीपà¥à¤° और आसपास के जिलों में à¤à¥€ यह बीमारी फैली थी। फफूंद जनक यह बीमारी पैरीकà¥à¤²à¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अंगà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ फैलती है।
डा. à¤à¤¸à¤•े सिंह ने बताया कि केले की यह बीमारी केले की परिपकà¥à¤µ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ मिडà¥à¤°à¤¿à¤µ पिटीआल पेडà¥à¤¨à¥‡à¤•ल और फलों को पकड़ती है। इस रोग के लगने से घौंद का विकास न होना और फà¥à¤²à¥‹ में छोटे-छोटे गडà¥à¤¢à¥‡ और निशान देखने को मिले। यहां तक कि केले के फलियों के à¤à¥€à¤¤à¤° का à¤à¤¾à¤— à¤à¥€ काला था। बताया कि इस रोग का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• वरà¥à¤·à¤¾ तो है ही, इसके अलावा किसान अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के चकà¥à¤•र में घने बाग लगा देते हैं, जिससे उस बाग में नमी और आरà¥à¤¦à¥à¤°à¤¤à¤¾ हमेशा बनी रहती है। इसके चलते इस पà¥à¤°à¤•ार के रोग फैलने की आशंका अधिक रहती है। इसके अलावा यह रोग न हो इसके लिठउचà¥à¤š कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ के फफूंद नाशक दवाओं जैसे टेबà¥à¤•ोनाज़ोल और टà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤«à¥à¤²à¥‹à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ का कॉमà¥à¤¬à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤• गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ लीटर पानी और मेटीरम 55 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ व पाइराकà¥à¤²à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ दो गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ लीटर में छिड़काव करें।
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